Mera ek din

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मेट्रो से उतर गेट नंबर तीन से बाहर आ मैंने चलना शुरू किया GB रोड की तरफ….स्कूल पहुचा तो देखा ताला लगा है… खैर कोई बात नहीं….
चाबी लेने चला गया नाना जी के घर की तरफ…
वंहा पहुंचा तो देखा, एक बच्चा, रिकक्षा पर बैठा था..मुझे देख वो मुस्कुराये और मे उसे देख..!!!

“चलो, एक बच्चा तो मिल गया स्कूल का…भगवान् का शुक्र है अब पूरा दिन अकेले नहीं काटना पड़ेगा…” मन मे बस यही गूंज पड़ा और एक अनूठी सी ख़ुशी की अनुभूति हुई….!!!

दिन निकला और न जाने क्या दिमाग मे सुझा की मैंने बच्चे से पुछा, “क्यों रे रिक्शा पर बैठा क्या कर रहा था ??”
उसने कहा, “आपका इंतज़ार! आपने कहा था न की कल आकर स्कूल खोलोगे…!!!!”

अल्लहा!!!!! न जाने कब से बैठा मेरा इंतेज़ार कर रहा होगा वो मेरा… सोचने की इच्हा तो हुई पर उसका जवाब ऐसा था की बस मे हत्प्रभ होकर रहे गया..!!! अभी भी लिखना चाहता हूँ बहुत कुछ पर सिर्फ उस के बारे मे सोच कर रहे जाता हूँ…. क्या किसी की जिंदगी मे इस क़द्र जगह बनायीं जा सकती है ??

इतना कह सकता हूँ की अच्छा लगा की मे भी गीतांजली दी के खुशिया फेलाने की कोशिश मे एक छोटा सा हिस्सेदार हूँ …. और अगर सब ठीक रहा तो हमेशा रहूँगा..!!!

खैर, कुछ और भी था जो शायद सबको पसंद आये….सामने जूता बनाने वाले कारीगर भैया से बात कर रहा था तो वो भी बोले आज तो सिर्फ एक ही बच्चा आया है…छुट्टी मना रहे हैं सारे…!!!
कंही ऐसा लगा मानो उन्हें भी सुकून मिलता है की चलो कुछ तो अच्छा हो रहा है आसपास….!!!
बस अंत मे यही कह सकता हूँ की आज का दिन बेहद सुकून भरा रहा…!!!!

– Shekhar Jain

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